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woh kehte hai....
वो कहते है के वो नाराज़ नहीं ... फिर क्यूँ कर कोई आवाज़ नहीं???? वो हमारी बातों पर रूठ जाना कुछ कहते कहते चुप हो जाना हमारी नादानी पर मुस्कुराना और फिर गुस्सा दिखाना हमारे मनाने पर ना मानना और फिर अचानक खिलखिलाना .........
अब ऐसा नहीं कुछ शायद नाराज़ है वो सच मुच ना ही हसी , ना मुस्कराहट चंद दिनों से.... नहीं कोई आहट
वो पहले जैसा प्यार नहीं और वो कहते है के वो नाराज़ नहीं.....................
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